उदयपुर में सेंसिटिव जोन की नई कॉलोनियों पर लगी रोक |

जनता द्वारा पूछे गए सवाल जिनका जवाब देते हुए नजर आय अरविंद पोसवाल (आई ए एस ) उदयपुर | सवाल कुछ इस प्रकार है |

प्र. उदयपुर की शान अरावली हील्स को तेजी से कटा जा रहा है ?

अरावली को बचाना बहुत जरूरी है | खान विभाग से कार्रवाई पर पता लगा की पहाड़ को 90 डिग्री पर नहीं काटा जा सकता। पहले इको सेंसेटिव जोन में कॉलोनियों के आवेदन लगते थे। इस पर अब रोक लगा दी गयी है। मॉनिटरिंग कमेटी में आवासीय प्लान निरस्त कर रहे हैं। मूल घर बनाना और कॉलोनी काटना अलग बात है। आधार, वोटर कार्ड दो तो घर की परमिशन देंगे। लोगों को जागरूक होना अति आवश्यक है |

प्र. रेरा से बिना परमिशन लिऐ , अनियमित कॉलोनियां दिन-ब-दिन बढ़ती जा रहीं हैं |

पोसवाल जी का कहना है की नियमों के विरुद्ध जो कार्य करेंगे, उनपर कार्रवाई होगी। जब भी अनियमित रूप से काम होता है तो सेवर की ,पानी की और सड़को की समस्या अवश्य होती ही है | जिस से आम जनता को और पर्यावरण को नुक्सान पहुँचता है |

प्र. उदयपुर (झीलों का शहर) पिछोला में डीजल-पेट्रोल की नावों का संचालन हो रहा है?

लेक पिछोला इक सिंगल ऐसा स्थान है जो डेस्टिनेशन वेडिंग के लिए और टूरिस्ट प्लेसेस लिए बहुत प्रसिद्ध है| जनता की पहली पसंद वही है ,जहां वे अपनी वेडिंग successfully प्लान कर सकते हैं | झील संरक्षण समिति की बैठक में बात रखी जाएगी कि होटल संचालक इंटरनेशनल स्टैंडर्ड काम में लें, इसके लिए विकसित देशों में कैसे काम हो रहा है, उसका उदाहरण लिया जायगा । जिसे की यहाँ के होटल संचालकों को देंगे, ताकि झील को नुकसान नहीं पहुंचे। इसके अलावा नगर निगम ने इको फ्रेंडली के लिए इलेक्ट्रिक बोट का टेंडर कर दिया है। जब तक इलेक्ट्रिक बोट नहीं आती, तब तक डीजल-पेट्रोल की नावें चलेंगी।

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प्र. उदयपुर तेजी से उभरता हुआ इक विकसित स्थल है फिर भी सुविधाओं की कमी देखीं जा रही है ?

पर्यटकों की सुविधाओं के लिए निरंतर प्रयास किए जा रहे हैं। कोशिश है कि प्रमुख स्थानों पर हेल्प डेस्क बना दी जाए। सड़कों पर इन्फो बोर्ड लगाकर उदयपुर के बारे में बताया जाए ताकि लोग उदयपुर के बारे में अच्छे से जान सके |